कोरोना काल में ड्यूटी कर रहे शिक्षकों-कर्मचारियों को संक्रमण, 367 की मौत, फिर भी नहीं कोरोना योद्धा


प्रदेश में अब तक विभाग के अधिकारी, कर्मचारी व शिक्षक सहित करीब 367 कर्मचारियों से कोराेना संक्रमण के चलते मौत हुई है।


देश गांव
उनकी बात Published On :

इंदौर। प्रदेश में कोरोना संक्रमण से कई कर्मचारी संक्रमित हो चुके हैं। इनमें एक बड़ी संख्या स्कूल शिक्षा विभाग के कर्मचारियों की भी है। प्रदेश का स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारी, कर्मचारी, प्राचार्य और शिक्षक इससे संक्रमित हैं और इनकी संख्या रोज़ाना बढ़ती ही जा रही है।

प्रदेश में अब तक विभाग के अधिकारी, कर्मचारी व शिक्षक सहित करीब 367 कर्मचारियों से कोराेना संक्रमण के चलते मौत हुई है। इसमें सबसे ज्यादा 334 शिक्षक हैं। इसके अलावा साथ ही 19 कर्मचारी, 11 प्राचार्य और 2 अधिकारी शामिल हैं।

वहीं विभाग में कोरोना संक्रमित भी बढ़ रहे हैं। फिलहाल 1809 संक्रमित कर्मचारियों में से 1633 शिक्षक कोरोना संक्रमित हैं। इनमें  80 प्राचार्य, 73 कर्मचारी व 23 अधिकारी शामिल है।

प्रदेश भर में कोरोना से मौत और संक्रमिताें में इन शिक्षकों की संख्या अधिक है। इसकी एक बड़ी वजह इनका फ्रंट लाइन में काम करना है। सरकार ने कोराना आपदा सेंटर, कोरोना सर्वे और टीकाकरण कार्य आदि में शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है। हालांकि इसके बाद भी कोरोना से जान गंवाने वाले कर्मचारियों को कोरोना योद्धा नहीं माना जाता है।

ऐसे में शिक्षक संगठनों ने इसका विरोध जताते हुए मांग की है कि उन्हें भी कोरोना योद्धा घोषित किया जाए और उन्हें इलाज में आर्थिक मदद की जाए।

इसी संबंध में मध्यप्रदेश शिक्षक कांग्रेस के प्रांतीय प्रवक्ता सुभाष सक्सेना ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि वर्तमान में कोराना महामारी का भयावह स्थिति है।

शिक्षक संगठनों के मुताबिक कोरोना की इस दूसरी लहर के दौरान शिक्षकों ने बढ़-चढ़ कर सेवा की है और प्रदेश के हजारों नियमित शिक्षक एवं अध्यापक संवर्ग के शिक्षक इस सेवा के दौरान संक्रमित हुए हैं। इनमें से सैकड़ों शिक्षक व अध्यापकों की मृत्यु हो गई है ।

शिक्षक संघ के मुताबिक फिलहाल कोरोना का इलाज बहुत महंगा है। इसकी दवाइयां इंजेक्शन, ऑक्सीजन भी बहुत महंगे दामों में मिल रहे हैं। ऐसे में शिक्षकों को कोरोना की ड्यूटी लगाने से वे लगातार हजारों की संख्या में संक्रमित होकर अस्पतालों में भर्ती हैं।

इस दौर में शिक्षकों को इलाज कराने के लिए बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। इस आर्थिक संकट से निराकरण के लिए संगठन ने सुझाव दिया है कि प्रदेश में जो नियमित शिक्षक हैं उनके उनके भविष्य निधि खाते से 24 घंटे के अंदर भविष्य निधी खाते से दो लाख रुपये निकालने के निर्देश दिए जाए।

इसके साथ ही अध्यापकों को 24 घंटे के अंदर चिकित्सा एडवांस के रूप में दो लाख रुपये उनके खाते में दिए जाए और उस राशि को आसान किस्तों में वापस ले लिया जाए।

इसके अलावा शिक्षकों और कर्मचारियों को कोरोना योद्धा घोषित करने की मांग भी की जा रही है।  शासकीय अध्यापक संगठन के प्रदेश संयोजक उपेंद्र कौशल के मुताबिक शिक्षा विभाग में 366 शिक्षकों, कर्मचारियों व अधिकारियों की मृत्यु हो चुकी है,लेकिन शासन ने शिक्षकों को कोरोना योद्धा का दर्जा नहीं दिया और ना ही फ्रंट लाइन वर्कर्स मानकर शासकीय कर्मचारियों के समान शासकीय सुविधाओं का लाभ दिया जा रहा है, जबकि शिक्षकों से प्रदेश भर में कोरोना महामारी में लगातार काम कराया जा रहा है। हमारी मांग है कि कोरोना योद्धा घोषित किया जाए।