सभी सरकारों मे मानी जाती है इस जिले की ‘धार’


सरकार किसी दल की बने मगर मंत्रिमंडल में धार जिले का हमेशा रहा है दबदबा, कांग्रेस ने जिले के अपने नौ विधायकों को बनाया मंत्री तो भाजपा ने आठ बार मंत्री बनाकर दिया मौका


आशीष यादव आशीष यादव
धार Published On :

प्रदेश में अब तक का राजनीतिक इतिहास गवाह है कि मध्यप्रदेश सत्ता चाहे किसी भी दल की रही हो आदिवासी बहुल धार जिले का मंत्रिमंडल में हमेशा दबदबा रहा है। जिले की राजनीति ने मध्य प्रदेश में अपना प्रभाव रखने वाले कई मंत्री दिए हैं। सत्ताधारी दल में चाहे डिप्टी सीएम हो या बड़े विभागों के मंत्री हो या बात की जाए नेता प्रतिपक्ष की तो धार का प्रतिनिधित्व हमेशा धारदार रहा है। इस बार भी मंत्रिमंडल में धार को उसका सम्मान मिलेगा राजनीति से जुड़े लोग इसे लेकर अनुमान लगा रहे हैं। आज भी सियासत की साह में धार ने अपनी अलग पहचान को कायम रखा है।प्रदेश की राजनीति में धार जिले की अलग पहचान है। यहां से कई नेताओ को चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचने पर सरकार में मंत्री और विपक्ष में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभाने का मौका मिला। यह कोई अतिश्योक्ति नहीं, बल्कि राजनीति के अखाड़े में नेताओं की नेतृत्व क्षमता की ताकत है।

राजधानी दिल्ली और भोपाल तक धार के नेताओं की तूती बोलती है। इतिहास पर नजर डालें तो जिले से चुनाव जीतकर जाने वाले भाजपा-कांग्रेस के नौ नेता मंत्री बने। इनमें अकेले जिले के निमाड़ अंचल से दो डिप्टी सीएम और आठ मंत्री रहे हैं। कांग्रेस शासन में सबसे अधिक मौका मिला। पार्टी से लंबे समय तक मंत्री रहने का सौभाग्य जमुनादेवी को मिला। कांग्रेस से जमुनादेवी और शिवभानुसिंह सोलंकी डिप्टी सीएम भी रहे। वहीं भाजपा में वरिष्ठ नेता विक्रम वर्मा समेत रंजना बघेल बीजेपी की सरकार बनने पर दो बार मंत्री पद पर काबिज रहे।

फतेहभानुसिंह बने थे पहले राज्यमंत्री:
धरमपुरी विधानसभा क्षेत्र के तहत ग्राम भुवान्या में जन्मे कुंवर फतेहभानुसिंह पहले ऐसे विधायक थे, जो 1960-65 में गोविंद नारायणसिंह के मुख्यमंत्री काल मे कृषि मंत्री रहे। इसके बाद भी उन्होंने तीन बार विधानसभा व एक बार लोकसभा चुनाव लड़ा था। उनके बाद की पीढ़ी आगे चलकर कांग्रेस के लिए राजनीति करने लगी।

विपक्ष मे नेता प्रतिपक्ष रहे जमुनादेवी और विक्रम वर्मा:
कांग्रेस की कद्दावर नेत्री जमुनादेवी और भाजपा नेता विक्रम वर्मा ऐसे दो बड़े नाम हैं, जो मंत्री और नेता प्रतिपक्ष रह चुके हैं। जमुनादेवी 1985 से 2008 तक लगातार अलग-अलग पदों पर रही व एक बार उपमुख्यमंत्री के पद पर भी रही हैं और 2003 से 2008 के बीच विपक्ष में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभाई। इसी प्रकार विक्रम वर्मा 1980 और 1990 में कैबिनेट मंत्री और 1993 से 1998 तक विपक्ष के नेता रहे।

 नीना वर्मा और कालूसिंह ठाकुर इस बार दावेदार: इस बार 2023 के विधानसभा चुनाव में धार जिले की सात सीटो पर चुनाव हुए थे जिसमें से 5 पर कांग्रेस तो 2 पर भाजपा ने जीत हासिल की है। धार से नीना वर्मा लगातार चार चुनाव जीतने के कारण मंत्री पद की प्रबल दावेदार हैं। इस बार पिछली भाजपा सरकार में मंत्री रहे राज्यवर्धन सिंह दत्तीगांव के चुनाव हार जाने के बाद नीना वर्मा की दावेदारी और भी प्रबल हो गई है। वहीं 2013 मैं भी विधायक निर्वाचित होने के बाद इस बार भी धरमपुरी से जीत कर आए कालूसिंह ठाकुर भी मंत्री पद के प्रबल दावेदार हैं क्योंकि जिले की 5 में से चार आदिवासी सीटों पर कांग्रेस जीती है और एकमात्र धरमपुरी ऐसी सीट है जहां से ठाकुर ने भाजपा का सम्मान बचाया है। ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि जिले के विधायक उमंग सिंघार को कांग्रेस नेता प्रतिपक्ष बना सकती है ऐसे में आदिवासी क्षेत्र में पार्टी को मजबूत बनाए रखने के लिए भारतीय जनता पार्टीकालूसिंह ठाकुर को मंत्रिमंडल में स्थान दे सकती है। वही निगममंडल में कैबिनट मंत्री के रूप में राजवर्धनसिंह दत्तीगांव का नाम भी होगा शामिल।

इन नेताओं से रही प्रदेश में धार की राजनीतिक पहचान:

 

  1.  फतेहभानु सिंह, कांग्रेस से 1965 में गोविंद नारायण सिंह सरकार में कृषि मंत्री बने।
  2. शिवभानुसिंह सोलंकी, कांग्रेस से 1980 में समाज कल्याण, पंचायत व सिंचाई में डिप्टी सीएम।
  3. जमुना देवी, कांग्रेस से 1985 स्वतंत्र राज्य मंत्री व आदिम जाति, अजा तथा पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग।
  4. विक्रम वर्मा, बीजेपी से 1980 में संसदीय मंत्री।
  5. जमुनादेवी,  कांग्रेस से 1993 में, मंत्री सामाजिक कल्याण व महिला एवं बाल विकास।
  6. जमुनादेवी, कांग्रेस से 1998 में, उपमुख्यमंत्री, प्रभारी महिला एवं बाल विकास विभाग मंत्री।
  7. प्रताप सिंह बघेल, कांग्रेस से 1998 में परिवहन मंत्री, सिंचाई विभाग।
  8. विक्रम वर्मा, बीजेपी से 1990 में, स्कूल शिक्षा व खेल मंत्री।
  9. विक्रम वर्मा, बीजेपी 1998 में,  नेता प्रतिपक्ष।
  10. रंजना बघेल, बीजेपी से 1990 में संसदीय सचिव।
  11. जमुनादेवी, कांग्रेस से 2003 में नेता प्रतिपक्ष।
  12. जगदीश, मुवेल बीजेपी से 2003 में गृहमंत्री।
  13. रंजना बघेल, बीजेपी से 2008 में युवा कल्याण विभाग मंत्री।
  14. रंजना बघेल, बीजेपी से 2013 में महिला एवं बाल विकास विभाग मंत्री।
  15. सुरेंद्रसिंह बघेल, कांग्रेस से 2018, नर्मदा घाटी विकास मंत्री।
  16. उमंग सिंघार, कांग्रेस से 2018 में, वन मंत्री।
  17. राजवर्धनसिंह दत्तीगांव, बीजेपी से 2020 में, उद्योग नीति और निवेश प्रोत्साहन मंत्री।



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