कांग्रेस नेता अंतर सिंह दरबार ने मंत्री उषा ठाकुर पर लगाए गंभीर आरोप, कहा मनरेगा सहित सभी जगह भयंकर भ्रष्टाचार लेकिन सज़ा नहीं


दरबार ने कहा कि विधानसभा में छोटे किसानों को खाद तक नहीं मिली लेकिन मंत्री उषा ठाकुर ने कुछ नहीं किया


देश गांव
इन्दौर Updated On :

इंदौर। पिछले दिनों नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह ने प्रदेश में अघोषित आपातकाल होने की बात कही थी। उनका यह बयान कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं पर पुलिस और प्रशासन द्वारा की जा रही कार्रवाईयों को लेकर था। इसके बाद प्रदेश के कई दूसरे कांग्रेसी नेताओं ने इस तरह के आरोप लगाए हैं। इन नेताओं के मुताबिक प्रदेश के मंत्री अपने इलाकों में कांग्रेसियों को निशाना बना रहे हैं। इस बार कांग्रेसी नेता और महू के पूर्व विधायक अंतर सिंह दरबार ने अपने इलाके में मंत्री उषा ठाकुर पर कांग्रेसी नेताओं को परेशान करने, उन्हें झूठे मुकदमों में फंसाने के आरोप लगाए हैं। यही नहीं दरबार ने कहा कि महू विधानसभा में छोटे किसानों की हालत खस्ता हो रही है जिस पर मंत्री ध्यान भी नहीं दे रहीं हैं। दरबार ने आरोप लगाया कि विधानसभा में भयंकर भ्रष्टाचार हुआ है और यहां मनरेगा का काम भी केवल कागज़ों पर ही हुआ है।

प्रेस से बात करते हुए पूर्व विधायक अंतर सिंह दरबार ने कहा कि महू में पंचायतों में भ्रष्टाचार के कई मामले सामने आए है और इनमें कार्रवाई नहीं हो रही है क्योंकि जिन पंचायतों में भ्रष्टाचार हुआ है वहां भाजपा के सर्मथित सरपंच हैं वहीं कांग्रेस नेताओं को फंसाने के लिए उनकी पंचायतों में जबरदस्ती भ्रष्टाचार के मामले बनाए जा रहे हैं और उन्हें परेशान किया जा रहा है तथा भाजपा के पक्ष में आने का दबाव तक डाला जा रहा है।

इन मामलों के उदाहरण देते हुए दरबार ने कहा कि मेण पंचायत में पूर्व सरपंच माया पटेल थीं जिन पर पंचायत चुनाव के बीचों बीच कार्रवाई की गई। उनकी पंचायत की अचानक जांच की गई और इसके बाद अगले एक दो दिन में ही उन पर बीस लाख रुपये की अनियमितता का आरोप लगा दिया गया और उनकी गिरफ्तारी का पूरा इंतज़ाम किया गया। इस मामले में उनके पति बैकुंठ पटेल को भी आरोपी बना दिया गया जबकि इसका कोई नियम नहीं है। यह सब इसलिए किया गया ताकि इस बार सरपंच का चुनाव लड़ रहे उनके पति बैकुंठ पटेल को चुनाव से बाहर किया जा सके और किसी भी तरह मेण का चुनाव जीता जा सके।

इसके उलट कोदरिया पंचायत रही। जहां पचास लाख रुपये से अधिक का भ्रष्टाचार जांच में साबित हो गया और इसके बाद एफआईआर भी हो गई लेकिन आज तक सरपंच या उनके पति के खिलाफ़ मेण की पूर्व सरपंच की तरह कोई कार्रवाई नहीं की गई। दरबार ने कहा कि जिले में जो भी जिलाबदर के नोटिस दिए गए हैं उनमें से ज्यादातर कांग्रेस नेताओं को ही मिले हैं ताकि वे चुनावों के दौरान उनके क्षेत्रों से ही बाहर किये जा सकें। दरबार ने कहा कि महू में मंत्री ठाकुर का यह रवैया उनके डर को दिखाता है।

दरबार ने कहा कि मंत्री खुद ही कानून का उल्लंघन करती रहीं हैं और वन विभाग के अधिकारी ने उनके खिलाफ लिखित शिकायत दी थी लेकिन मंत्री ने प्रभाव का इस्तेमाल कर उसे दबा दिया।

 

इसके अलावा उन्होंने किसानों की समस्याओं पर भी मंत्री उषा ठाकुर के मौन रहने की बात कही। उन्होंने कहा कि मंत्री ठाकुर के क्षेत्र में किसानों को ऋण माफ़ी का लाभ नहीं मिल सका और न ही मुख्यमंत्री ने अपने वादे के अनुसार ब्याज माफ किया। ऐसे में किसानों के खाते ओवर ड्राफ्ट में चले गए और उन्हें इसी के चलते खाद नहीं दी गई। दरबार ने कहा क्षेत्र में किसानों को जरुरत के मुताबिक खाद नहीं मिली और इसके कारण सबसे ज्यादा परेशानी छोटे किसानों को हुई। उन्होंने सवाल किया कि क्या हमारे किसान पाकिस्तान से आए हैं जिन्हें आपने ओवर ड्यू बताकर खाद नहीं दिया।

उन्होंने कहा कैबिनेट मंत्री होने के बावजूद इंदौर जिले की तीन विधानसभाओं सांवेर, देपालपुर और इंदौर के कर्ज़ माफ़ हो गए लेकिन महू तहसील इससे वंचित रह गई जबकि महू में एक कैबिनेट मंत्री थीं। कांग्रेस नेता ने महू विधानसभा में भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन के भी आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इन मामलों को गंभीरता से लेगी और क्षेत्र में आंदोलन करेगी।



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