SBI के सब्सिडी घोटाले में आज फिर CBI ने मारा छापा, पद पर अब भी बने हुए हैं दोषी अधिकारी


बैंक में दर्जनों लोगों को कई योजनाओं के तहत कई लाख रुपए के लोन दिए गए। मसलन, खादी ग्राम उद्योग विभाग की योजनाएं, जिनमें सब्सिडी मिलती है, ऐसी कई योजनाएं हैं जिनमें सब्सिडी से मिलने वाली राशि को डेबिट-क्रेडिट कर गोलमाल किया गया है।


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जबलपुर Published On :

नरसिंहपुर। यूको बैंक नरसिंहपुर, बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा करेली के बाद अब स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, शाखा नरसिंहपुर का घोटाला सुर्खियों में है। यहाँ सीबीआई जबलपुर के आधा दर्जन अधिकारियों ने सोमवार को एक बार फिर दबिश देकर जांच की। कई के बयान दर्ज किए l सीबीआई के अधिकारी भी हैरत में हैं कि बड़े घोटाले के बावजूद यहां पदस्थ बैंक अधिकारी जस के तस जमे हैं।

गबन का प्रकरण नया नहीं है। एफआईआर दर्ज हो चुकी है, सोमवार को भी टीम जांच करने ही पहुंची थी।
– पीके पांडे एसपी, सीबीआई जबलपुर

सोमवार को सीबीआई के आधा दर्जन अधिकारी कई करोड़ के घोटाले की जांच के मामले में एक बार फिर नरसिंहपुर पहुंचे तो उन्होंने स्टेट बैंक आफ इंडिया की मुख्य शाखा में काफ़ी देर पड़ताल की। अधिकारियों से पूछताछ करते रहे। सीबीआई ने अपने एक हवलदार रैन्क के कर्मचारी से करीब 22 लोगों को नोटिस भी तामील कराए। बताया जाता कि यहां कुछ समय पहले पदस्थ रहे शाखा प्रबंधक आनंद ने गाइडलाइन को दरकिनार कर दर्जनों लोगों को ऋण देने के नाम पर बंदरबांट की।

सब्सिडी का खेल

बैंक में दर्जनों लोगों को कई योजनाओं के तहत कई लाख रुपए के लोन दिए गए। मसलन, खादी ग्राम उद्योग विभाग की योजनाएं, जिनमें सब्सिडी मिलती है, ऐसी कई योजनाएं हैं जिनमें सब्सिडी से मिलने वाली राशि को डेबिट-क्रेडिट कर गोलमाल किया गया है। एक ठेकेदार भागचन्द व अन्य राजेश तिवारी, घनश्याम मालवीय समेत कई लोग हैं जिनके खातों से राशि गोल कर दी गई।

बाद में जब शिकायतों का दौर शुरू हुआ तो बैंक मैनेजर ने राशि खातों में वापस पहुंचाई। एक-दो मामलों में तो सीबीआई ने लोगों से पूछताछ भी की।

कुछ समय पहले ही मैंने जॉइन किया है इसलिए मैं अभी कुछ नहीं कह सकता।  
-जयप्रकाश साहू, शाखा प्रबंधक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, कृषि शाखा. नरसिंहपुर 

हाई प्रोफाइल सबंध

अधिकांश तौर पर बैंक शाखाओं में अधिकारी कर्मचारी 2 या 3 साल ही पदस्थ रहते हैं पर यहां तत्कालीन बैंक मैनेजर गड़बड़ियों के बावजूद अपनी कुर्सी जमाए रखने में कामयाब हैं। नेताओं और अधिकारियों से भी अच्छा तगड़ा जाल नेटवर्क बनाए रखा है। लाखों करोड़ों के घोटाले पर अगर किसी हितग्राही को नुकसान पहुंचा है तो वह शिकायतकर्ता पर विशेष तौर पर पुलिस के अधिकारियों से उन पर दबाव बनवाता।

करीब 4-5 साल पहले यहां पर पदस्थ रहे एक पुलिस अधिकारी से उसके अच्छे संबंध थे। उन संबंधों की आड़ में कई शिकायत करने वालों पर दबाव बनाया जाता कि वह शिकायत वापस ले। कुछ शिकायतें बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय तक पहुंची, बावजूद इसके यह अधिकारी अभी भी मुख्यालय की विभिन्न शाखाओं में ही पदस्थ रहा- कभी बैंक की मुख्य शाखा में तो कभी मंडी रोड स्थित शाखा में। अभी भी अब वह एग्रीकल्चर शाखा में सेवारत है।



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