नरसिंहपुरः GI टैग जल्द मिलने से जिले की बासमती व शरबती हो जाएगी और भी खास


धान और गेहूं के उत्पादन में लगातार आगे बढ़ रहे नरसिंहपुर जिले में बासमती और शरबती और अधिक खास हो जाएगी। जल्द ही जीआई टैग मिलने का प्रशस्त हो रहा मार्ग इन दोनों जींसों के लिए किसानी और व्यापार को नया आयाम देगा।


ब्रजेश शर्मा ब्रजेश शर्मा
नरसिंहपुर Updated On :
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– धान की आपत्ति ली गई वापस, शरबती को मिली मंजूरी
नरसिंहपुर। धान और गेहूं के उत्पादन में लगातार आगे बढ़ रहे नरसिंहपुर जिले में बासमती और शरबती और अधिक खास हो जाएगी। जल्द ही जीआई टैग मिलने का प्रशस्त हो रहा मार्ग इन दोनों जींसों के लिए किसानी और व्यापार को नया आयाम देगा।

बासमती धान के लिए जीआई टैग को लेकर कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) द्वारा आपत्ति वापस लिए जाने और शरबती को टीआई टैग के लिए मंजूरी देने से यह रास्ता अब आसान हुआ है जो कई सालों से लटका था।

एपीडा ने बासमती धान के लिए जीआई टैग देने को लेकर उठाई आपत्ति वापस लेने का निर्णय लिया है। अब कृषि मंत्रालय भारत सरकार इस पर कार्रवाई करेगा। करीब 12 साल से बासमती धान को जीआई टैग देने का विवाद अब सुलझने के आसार हैं।

राज्य सरकार भी सुप्रीम कोर्ट में दायर विशेष अनुमति याचिका वापस ले सकती है। शरबती गेहूं को जीआई टैग देने के प्रस्ताव की मंजूरी एपीडा ने कृषि मंत्रालय को भेज दिया है।

नरसिंहपुर जिला समेत प्रदेश के 14 जिलों में बड़ी संख्या में बासमती धान की खेती होती है, लेकिन जीआई टैग नहीं होने से इसे मध्यप्रदेश की बासमती के नाम से नहीं बेचा जा सकता। इसका फायदा कुछ बिचौलिये उठाते हैं और वे कम दाम पर बासमती खरीदकर दूसरे राज्यों के नाम पर निर्यात करते हैं।

बता दें कि जीआई टैग के लिए पंजाब सरकार ने आपत्ति दर्ज कराई थी, जिससे यह मामला खटाई में पड़ गया था। राज्य सरकार की तरफ से पेश किए गए तथ्य व साक्ष्य में बताया गया कि किस तरह एमपी में कई दशकों से बासमती का उत्पादन किया जा रहा है।

शरबती गेहूं को भी जीआई टैग देने का प्रस्ताव एपीडा ने कृषि मंत्रालय को भेजा है। शरबती गेहूं पूरे देश में मध्यप्रदेश के नाम से प्रसिद्ध है। जीआई टैग मिलने से यह पुख्ता हो जाएगा। शरबती गेहूं उत्पादक क्षेत्रों नरसिंहपुर समेत पड़ोसी जिले होशंगाबाद, विदिशा, रायसेन, सीहोर आदि को भौगोलिक पहचान मिलेगी, जिससे कारोबार में बढ़ोत्तरी होगी।

ब्रांड नाम मिलने से क्षेत्र का नाम भी रोशन होगा। यद्यपि पिछले कुछ वर्षों से समर्थन मूल्य पर हो रही खरीदी से शरबती गेहूं के उत्पादन में कमी आई है फिर भी बड़े कृषक कास्तकार इसे प्रमुखता से बोते हैं।

इसी तरह बासमती धान भी नरसिंहपुर समेत पड़ोसी जिलों होशंगाबाद, जबलपुर, विदिशा, रायसेन व अन्य जिलों शिवपुरी, गुना, दतिया, ग्वालियर, भिंड, मुरैना आदि में होती है। नरसिंहपुर जिले में तो इसका रकबा करीब 27 हजार हेक्टेयर में है।

कृषि उपसंचालक, नरसिंहपुर राजेश त्रिपाठी बताते हैं कि

जिले में करीब 30 हजार हेक्टेयर में बासमती धान का रकबा है। शरबती गेहूं भी जिले में होता है।

यह है जीआई टैग और यह होगा फायदा –

जीआई टैग अर्थात जियोग्राफिकल इंडिकेशन यानी भौगोलिक संकेतक। क्षेत्र विशेष में वस्तु या उत्पाद के उत्पादन को कानूनी मान्यता, गुणवत्ता व लक्ष्यों के आधार पर विशिष्ट पहचान मिलती है। बासमती और शरबती को जब यह पहचान मिलेगी तो उसके दाम भी बेहतर मिलेंगे और यह खास किस्म की प्रजाति की पैदावार को प्रोत्साहन मिलेगा।



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