छतरपुरः किसान अंदोलन के लिए गांव-गांव में जोड़ा जा रहा आटा राशन


किसानों के साथ छोटे-माध्यम व्यापारी में तबाही लाएगा कृषि कानून – अमित भटनागर।
खुले आसमान के नीचे तेईसवें दिन भी जारी रहा किसानों का धरना।


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छतरपुर Updated On :
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छतरपुर। केंद्र सरकार द्वारा लाए गए विवादित कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग के साथ स्थानीय छत्रशाल चौक पर सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर के नेतृत्व में जिले के किसानों का अनिश्चितकालीन धरना 23वें दिन भी जारी रहा।

धरने पर बैठे किसानों के लिए बबलू कुशवाहा, ओमप्रकाश यादव, बहादुर आदिवासी, परमलाल कुशवाहा, भगतराम तिवारी के नेतृव में भैरा, छपरा, कुपिया, मौराहा, सुरई आदि गांव के किसानों द्वारा आटा, सब्जी, दाल आदि आवश्यक राशन इकट्ठा कर धरनास्थल पहुंच कर दान किया गया। साथ ही जिले के कई गांव के किसान समर्थन करने धरनास्थल पर पहुंचने लगे हैं।

गठेवरा, बमारी, पनौठा, राधेपुर आदि कई गांव के किसानों ने धरनास्थल पर पहुंच केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के प्रति विरोध जताते हुए अपना समर्थन दिया। साथ ही किसानों ने जिला प्रशासन के तानाशाही पूर्ण व्यवहार के कारण बिना टेंट खुले आसमान में धरने के कारण बीमार पड़ रहे किसानों के स्वास्थ्य पर चिंता व्यक्त करते हुए, प्रशासन के रवैये की निंदा की।

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इसके बाद धरनास्थल पर किसानों की एक बैठक आयोजित की गई जहां किसान आंदोलन के नेतृत्वकर्ता अमित भटनागर ने कृषि कानूनों के नुकसान पर प्रकाश डालते हुए बताया कि केंद्र सरकार के कृषि कानूनों से किसान मजदूर तो बुरी तरह से प्रभावित होगा ही। साथ ही यह कानून छोटे-माध्यम व्यापारी को भी तबाह कर देगा। इससे कुछ पूंजीपतियों को छोड़ कर पूरे देश के करोड़ों किसान, आम नागरिक व व्यापारी बुरी तरह प्रभवित होंगे।

धरनास्थल पर हिसाबी राजपूत, बिहारी कुशवाहा ने “संगठन बना लो किसान मेरे भैय्या” गीत के माध्यम से किसानों को संगठन बनाने का संदेश दिया तो गांधी विचारक दिनेश मिश्रा द्वारा प्रतिदिन की तरह धरनास्थल पर सर्वधर्म प्रार्थना कराई गई।

धरने में मुख्य रूप से बालक दास पटेल, तुलसी आदिवासी, कवि माणिकलाल, देवीदीन खैरवार, सोना आदिवासी, बालादीन पटेल, हिसाबी राजपूत, राकेश तिवारी, छोटू अहिरवार, बालादीन कुशवाहा, परमलाल कुशवाहा, कैलाश विश्कर्मा आदि किसान सम्मिलित रहे।