अपराधियों के लिए रहे बुरे धार एसपी आदित्य प्रताप सिंह के कार्यकाल के दो साल पूरे


पुलिस का सुशासन व जनता के अच्छे दिनः 730 दिन उपलब्धियों के नाम रहे, जिले में सक्रिय तीन अपराधिक गैंग का खात्मा। दो साल में जिले में कोई साम्प्रदायिक विवाद नहीं। चोरी, लूट, डकैती पर लगा अंकुश। गुमशुदगी के मामलों में प्राथमिकता से कार्रवाई कर सैकड़ों बेटियों को उनके घर पहुंचाया।


आशीष यादव आशीष यादव
धार Updated On :
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धार। जून को जिले में कानून व्यवस्था की कमान संभालते हुए धार एसपी आदित्य प्रताप सिंह को पूरे 2 साल हो गए हैं। बीते दो साल जिले में अपराधी गैंगों के लिए बुरे साबित हुए हैं। वहीं जिले के आम नागरिकों के लिए अच्छे दिन हो गए हैं।

बीते दो साल अपराध को खत्म करने के उद्देश्य से चलाई गई मुहिमों के नाम रहे हैं। इसके नतीजे में चोरी, लूट व डकैती जैसी सतत वारदातों का क्रम बंद हो गया है। अब रात में भी जिले में एक स्थान से दूसरे स्थान पर आसानी से आया जा सकता है।

रात में चोरी, लूट व डकैती का डर ना आम लोगों को रहा है ना ग्रामीणों को रहा है। बीते दो सालों में हाइवे से लेकर गांवों में समूह बनाकर लूटपाट करने वाली गैंग का नेटवर्क नेस्तानाबूद किया गया है। गैंग के अधिकांश सदस्यों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया गया है।

प्रदेश में सरकार की सुशासन की अवधारणा में लॉ एंड आर्डर को मुख्य माना गया है। ऐसी स्थिति में बीते दो साल सुशासन के नाम रहे हैं। पुलिस की छवि आम जनता में विश्वसनीय साबित हुई है।

मनावर क्षेत्र में आकस्मिक घटनाक्रम ‘मॉब लिचिंग’ को दो वर्ष के घटनाक्रमों से अलग रखा जाए तो दो वर्ष धार जिले में अमन-चैन स्थापित करने में महत्वपूर्ण साबित हुए हैं। टीम वर्क के माध्यम से आज जिले में कानून व्यवस्था सुदृढ़ की गई है। इसमें अपराध शाखा की भी महत्वपूर्ण भूनिका रही है।

तीन आपराधिक गैंगों का सफाया बड़ी उपलब्धि –

4 जून 2019 को धार में आईपीएस आदित्य प्रताप सिंह की एसपी के रूप में पोस्टिंग हुई थी। जिला मप्र के सर्वाधिक संवेदनशील जिले में शामिल था। जिले का विस्तृत क्षेत्रफल और भोजशाला व कमाल मौलाना मजिस्द जैसे विवादित स्मारक के कारण स्थाई विवाद जैसे मसले चुनौती थे।

इससे बड़ी चुनौती कठिन भौगोलिक परिस्थिति में छुपे-बसे आपराधिक गैंग बोरडाबरा, माछ लिया और जामंदा भूतिया के बदमाशों से गांव में लूट, सड़क लूट जैसी घटनाएं थीं।
इन आपराधिक समूहों के सफाये को प्राथमिकता में शामिल किया गया। नतीजा यह रहा कि दर्जनों बदमाश गिरफ्तार करके सलाखों के पीछे डाले गए। हजारों-लाखों के फरार इनामी बदमाशों को पकड़ा गया। तीनों गैंग के अधिकांश सदस्य जेलों में डाल दिए गए। वहीं पुलिस के डर से कई क्षेत्र छोड़कर भाग गए।

ऑपरेशन मुस्कान के जरिये सैकड़ों बेटियां घर लौटीं –

बीत दो साल में महिला अपराधों पर नियंत्रण को लेकर खासा काम किया गया। जिले से गुमशुदा महिलाओं और बच्चों को तलाशने का काम किया गया। एक माह का विशेष अभियान नवंबर-दिसंबर में दस्तायाब अभियान के तहत चलाया गया।

ऑपरेशन मुस्कान के तहत जिले से गुमशुदा 100 से अधिक बालिकाओं को तलाश कर उनके घर पहुंचाया गया। इस तरह बीते दो वर्ष में करीब 500 के लगभग गुमशुदगी प्रकरणों में लोगों को तलाश कर आशियाने तक छोड़ा गया।

घरेलू हिंसा सहित दुष्कर्म जैसी घटनाओं पर अंकुश लगाया गया। जहां भी घटनाएं घटीं वहां पर दोषियों को सजा मिले इसके लिए ना सिर्फ सूक्ष्म विवेचना की गई बल्कि समयावधि से पूर्व चालान पेश किए गए।

पुलिस परिवार की फिक्र की, आवास बनवाए और हेल्थ कैम्प लगवाए –

एसपी आदित्य प्रताप सिंह ने सबसे पहले थानों का मैनेजमेंट किया। थानों का रिकॉर्ड अपडेट करने के साथ यहां पर टास्क देकर काम करवाया। थानों के बदमाशों की सूची अपडेट करवाई। प्रतिमाह सभी गुंडों की हाजिरी सुनिश्चित की। नतीजतन बदमाशों में पुलिस का खौफ कायम हुआ। इधर नए बदमाशों को उभरने नहीं दिया गया।

पुलिस टीम अपराधियों के खात्मे में जुटी तो टीम के परिवार को सुविधाएं उपलब्ध कराने में कोई कसर नहीं छोड़ी। बेहतर काम पर कर्मचारियों को प्रोत्साहित करना और इनाम देने का क्रम लगातार जारी रखा।

पुराने पुलिस थानों के स्थान पर नई इमारतें बनवाईं गईं। चौकी-थानों का विस्तार किया गया। पुलिसकर्मियों के परिवार के लिए आवास निर्माण, फिजिकल फिटनेस के लिए रनिंग ट्रेक, वॉकिंग ट्रेक व योगा शिविर जैसे कई प्रयोग किए गए।

98 प्रतिशत पुलिसकर्मियों का करवाया वैक्सीनेशन –

कोविड-19 का दो साल का दौर फ्रंटलाइन वॉरियर्स यानि पुलिसकर्मियों के लिए दोहरी चुनौती का साल रहा। बंद के दौरान लॉ एंड ऑर्डर का पालन और संक्रमण से खुद को सुरक्षित रखना चुनौती था। 191 पुलिसकर्मी संक्रमित हो चुके थे।

संवेदनशील पुलिस अधीक्षक की तरह एसपी आदित्य प्रताप सिंह ने अपने कर्मियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सभी के लिए संक्रमण से बचाव और रोकथाम हेतु सैनिटाइजर, एन-95 मास्क सहित सुरक्षा साधन मुहैया कराए।

उनके परिवार के लिए हेल्थ चेकअप शिविर, संक्रमित कर्मियों के लिए क्वॉरेंटाइन सेंटर, आइसोलेशन सेंटर बनवाए। प्रत्येक पुलिसकर्मी को यह महसूस कराया कि उनकी और परिवार की सुरक्षा को लेकर पुलिस महकमा साथ खड़ा है।

कुल मिलाकर अपने विभाग में शासन नहीं बल्कि सुशासन का लक्ष्य लेकर कर्मियों को टीम के रूप में साधकर काम करने की कला ने दो साल उपलब्धियों के नाम किए हैं। उन्होंने अपने 98 प्रतिशत पुलिसकर्मियों का वैक्सीनेशन भी करवाया।

चिटफंड कंपनियों के विरुद्ध कार्रवाई –

प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चोहान के निर्देश के पालन में जिले में सहकारिता एवं चिटफंड कंपनियों के माध्यम से आम लोगों के साथ ठगी करने वाले लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।

इस मामले से जुड़े लोगों को गिरफ्तार करके जेलों में डाला गया। नतीजे में अब जिले में पिछले आठ महीने में चिटफंड कंपनी के माध्यम से ठगी की कोई शिकायत सामने नहीं आई है।