इंदौरः पंचायत ने करोड़ों के बंगलों में दिखा दिए गरीबों के शौचालय


शिकायतकर्ता इस्तीयार कुरैशी के मुताबिक यह मामला जितना दिखाई दे रहा है उससे कहीं ज़्यादा बड़ा है। भाटखेड़ी ग्राम पंचायत में क्षेत्र की कुछ बड़ी कॉलोनियां हैं जिनमें पंचायत के द्वारा सांठ-गांठ कर करोड़ों रुपयों की सरकारी ज़मीनों पर कब्जे किए गए हैं।


अरूण सोलंकी अरूण सोलंकी
इन्दौर Updated On :

इंदौर।  स्वच्छ भारत अभियान के तहत ज़िले के गांवों में लाखों की संख्या में शौचालय बनाए गए हैं। इस दौरान बहुत से  ऐसे लोगों को लाभ दिया गया जो नियमानुसार इसके लाभार्थी नहीं थे। महू जनपद पंचायत क्षेत्र की भाटखेड़ी ग्राम पंचायत में स्वच्छ भारत योजना के तहत किए गए ज़मीनी काम की चौंकाने वाले वाली हकीकत सामने आई है। यहां करोड़ों रुपयों के आलीशान बंगलों में शौचालय दिखाए गए हैं।

इससे ज़्यादा अचरज की बात यह है कि बहुत से लोगों को नहीं पता है कि उनके बंगलों में पंचायत ने गरीबों को मिलने वाले बारह हज़ार रुपये के शौचालय बना दिए हैं। इस मामले की जांच पिछले कई महीनों से जारी थी जिसके बाद यह सिद्ध भी हो गया है लेकिन कोई ठोस कार्रवाई अब तक नहीं की गई है।

शिकायतकर्ता इस्तीयार कुरैशी अपना घर दिखाते हुए

इस्तीयार कुरैशी उर्फ बादशाह ख़ान नाम के एक व्यवसायी ने इस पूरे मामले को खोला है। वे पिछले डेढ़ साल से इस बारे में जानकारी जुटा रहे थे। जानकारी लेने के बाद उन्होंने जिला और जनपद पंचायत के अधिकारियों से इसके बारे में शिकायत की थी। जिसके बाद जनपद पंचायत ने मामले की जांच की और इन शिकायतों को सही पाया।

इस्तीयार कुरैशी का खुद के खुद के घर में भी पंचायत ने शौचालय दिखाया है। हालांकि उनका ये बंगलेनुमा घर करीब छह हज़ार वर्ग फुट में फैला है। इसी तरह उनके रिश्तेदार मुजीब खान को भी नहीं पता चला कि उनके बंगले में पंचायत ने कब शौचालय बना दिया।

इन दोनों सहित करीब बारह लोगों ने शपथपत्र देकर बताया है कि उनके घरों में किसी तरह के शौचालय पंचायत द्वारा नहीं बनवाए गए हैं और न ही किसी तरह का आर्थिक लाभ लिया गया है।

कुछ वर्ष पहले तक इस पंचायत में करीब 1600 शौचालय बनाए गए थे। हालांकि भाटखेड़ी क्षेत्र में पीथमपुर के उद्योगों में काम करने वाले वाले मज़दूर भी बड़ी संख्या में रहते हैं जिन्हें हितग्राही बनाया गया लेकिन इस इलाके में बड़े किसानों की संख्या भी कम नहीं है।

इनमें से कुछ किसानों को पंचायत ने कब हितग्राही बना दिया ये उन्हें भी नहीं पता चला। इनमें अबुल कुदुस, अब्दुल मुकील, इरफान, अनवर, अकील और मूसा आदि को इस्तीयार ख़ान की शिकायत के बाद ही पता चला कि वे गरीबों को दी जाने वाली इस योजना का लाभार्थी हैं।

पंचायत में कई दूसरे मामलों में भी वित्तीय गड़बड़ियां पकड़ी गई हैं। जिसके बाद वसूली की अनुशंसा भी की गई है।

इस बारे में कई ख़बरें दैनिक अखबारों में भी आ चुकी हैं और पंचायतों में हो रहे भ्रष्टाचार पर विभागों की कोई भी खुल रही है इसके बावजूद भी कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि यहां पूर्व सरपंच मेहमूद सेठ के कार्यकाल में सबसे ज़्यादा गड़बड़ियां हुईं हैं और वे अब भी पंचायत में अपना दखल रखते हैं।

महमूद सेठ स्थानीय भाजपा के नेता है और जनपद पंचायत के उपाध्यक्ष हैं इसलिए उनकी वित्तीय गड़बड़ियों को दबाया जा रहा है। उनके आरोप हैं कि सेठ के ही दबाव में कर्मचारियों और अधिकारियों ने यह सब किया और होने दिया।

मेहमूद सेठ स्थानीय विधायक और प्रदेश सरकार की कैबिनेट मंत्री  उषा ठाकुर के ख़ास बताए जाते हैं। हालांकि मंत्री के द्वारा इस मामले में किसी तरह के दख़ल की बात अब तक सामने नहीं आई है।

हालांकि मेहमूद सेठ इसे गलत बताते हैं उनके मुताबिक ऐसी कोई गड़बड़ी हुई ही नहीं है। वहीं मामले की जांच करने वाले जनपद पंचायत महू की टीम के मुताबिक गड़बड़ी हुई है और  यह गंभीर मामला है। यहां के सीईओ हेमेंद्र सिंह चौहान के मुताबिक उन्होंने जांच प्रतिवेदन जिला पंचायत सीईओ तक भेज दिया है और अब आगे की कार्रवाई उन्हीं के द्वारा की जाएगी।

शिकायतकर्ता इस्तीयार कुरैशी के मुताबिक यह मामला जितना दिखाई दे रहा है उससे कहीं ज़्यादा बड़ा है। भाटखेड़ी ग्राम पंचायत में क्षेत्र की कुछ बड़ी कॉलोनियां हैं जिनमें पंचायत के द्वारा सांठ-गांठ कर करोड़ों रुपयों की सरकारी ज़मीनों पर कब्जे किए और करवाए गए हैं।

उन्होंने इस मामले में भी जांच की मांग की है। ख़ान के मुताबिक इस मामले में अगर प्रशासन सही तरीक से जांच करता है तो पता चलेगा तो कई करोड़ रुपये की धोखाधड़ी सामने आएगी।

हमें इस बारे में जानकारी है। प्रकरण दर्ज कर लिया गया है अब आगे नोटिस जारी किये गए हैं। इस मामले में ठोस कार्रवाई की जाएगी।

हिमांशु चंद्र रॉय, सीईओ, जिला पंचायत इंदौर