हनी ट्रैप मामले में आरोपी तीन महिलाओं को 22 माह बाद हाईकोर्ट से मिली जमानत


– हरभजन सिंह पर हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी, हरभजन ने अपने पद का जमकर दुरुपयोग किया और फिर भेड़िये की तरह रोने लगा।


देश गांव
इन्दौर Published On :
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इंदौर। मध्यप्रदेश के बहुचर्चित हनी ट्रैप केस में 22 माह से जेल में बंद तीन आरोपियों श्वेता विजय जैन, श्वेता स्वप्निल जैन और मोनिका यादव को हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ से मंगलवार को जमानत मिल गई।

इसके साथ ही कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह बात सही है कि आरोपियों ने अनैतिक व अपमानजनक कार्य किया है, लेकिन उन्हें इसके लिए पूरी तरह से जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

कोर्ट ने यह भी माना कि वर्तमान परिस्थिति में प्रकरण की सुनवाई पूरी होने में लंबा समय लगने की संभावना है। अभियोजन को 57 गवाहों के बयान कराना है। अभी तो आरोपियों पर आरोप तक तय नहीं हुए हैं। ऐसे में आरोपी महिलाओं को जमानत का लाभ दिया जाना चाहिए।

कोर्ट ने आरोपियों से कहा है कि वे विचारण न्यायालय के समक्ष 50 हजार रुपये की जमानत और इतनी ही रकम का निजी मुचलका प्रस्तुत करें।

हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने एक जुलाई को इन याचिकाओं पर अंतिम बहस सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था जो मंगलवार को जारी हुआ। नौ पेज के फैसले में कोर्ट ने हनी ट्रैप मामले के फरियादी और तत्कालीन इंजीनियर हरभजन सिंह को लेकर तल्ख टिप्पणी की।

कोर्ट ने हरभजन सिंह पर तल्ख टिप्पणी करके हुए कहा कि उसने अपने पद और अधिकारों का जमकर दुरुपयोग किया और आरोपियों से अंतरंगता बनाई। बाद में जब चीजें उसके कंट्रोल से बाहर हो गईं तो वह भेड़िये की तरह रोने लगा।

बता दें कि नगर निगम के तत्कालीन इंजीनियर हरभजन सिंह ने 17 सितंबर 2019 को पलासिया पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि दो महिलाएं उसे अश्लील वीडियो सार्वजनिक करने की धमकी देकर उससे तीन करोड़ रुपये मांग रही हैं। बाद में उन्होंने इस रकम को दो करोड़ रुपये कर दिया।

सिंह की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने 19 सितंबर 2019 को श्वेता विजय जैन, श्वेता स्वप्निल जैन और एक अक्टूबर 2019 को मोनिका यादव नामक महिलाओं को हिरासत में लिया और तब से ही ये तीनों महिला आरोपी जेल में बंद हैं।

एडवोकेट विजय कुमार चौधरी, अमर सिंह राठौर, विवेक सिंह, यावर खान, धर्मेंद्र गुर्जर के माध्यम से इन आरोपी महिलाओं ने जमानत के लिए याचिकाएं दायर की थी।

उनका कहना था कि वे लंबे समय से जेल में हैं और प्रकरण की सुनवाई पूरी होने में लंबा समय लगने की आशंका है। ऐसे में उन्हें जमानत का लाभ दिया जाना चाहिए।