महूः वन विभाग की मनमानी कार्रवाई से आदिवासी परिवार खुले में रहने को मजबूर


बेदखल पीड़ित परिवार तहसील कार्यालय में चक्कर लगाकर गुहार लगा रहा है, लेकिन सिवाय निराशा के इनके हाथ और कुछ नहीं लग पा रहा है।


अरूण सोलंकी अरूण सोलंकी
इन्दौर Published On :
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महू। इन दिनों वन विभाग की कार्रवाई के कारण बारिश के मौसम में आदिवासी परिवार खुले मे रहने को मजबूर हैं। आदिवासी व गरीब होने के कारण ना वन विभाग सुन रहा है और ना ही राजनीति दल इनके लिए बोल रहा है।

बेदखल पीड़ित परिवार तहसील कार्यालय में चक्कर लगाकर गुहार लगा रहा है, लेकिन सिवाय निराशा के इनके हाथ और कुछ नहीं लग पा रहा है।

रेवती ग्राम का आठ आदिवासी परिवार वर्षों से यहां रह रहा था। बाढ में सब कुछ समाप्त होने के बाद दस साल पूर्व भाजपा के स्थानीय पूर्व विधायक कैलाश विजयवर्गीगय ने वन विभाग की जमीन पर रहने व जीवन यापन करने के मौखिक आदेश दिए।

इसके बाद से वे यहां रह कर जीवन यापन कर रहे थे। अब तक तो सब कुछ ठीकठाक चल रहा था, लेकिन गत दिनों अचानक वन विभाग ने इन परिवारों के खिलाफ कार्रवाई करना शुरू कर दिया तथा आठ में से पांच झोपडों को तोड़ दिया।

अब इन परिवारों के सदस्यों पर वन विभाग का इतना खौफ छा गया है कि वे रात को भी किसी की आहट होने पर डर जाते हैं। उन्हें डर सताता रहता है कि कहीं वन विभाग के अधिकारी ना आ जाएं।

पीड़ित परिवार अपनी मजदूरी छोड़कर तहसील कार्यालय आकर गुहार लगा रहे हैं लेकिन कोई असर होता नजर नहीं आ रहा।

बीते दिनों कैलाश विजयवर्गीय ने भी मौके पर पहुंच कर पीड़ित परिवार से चर्चा तथा निराकरण का आश्वासन दिया। पीड़ित परिवार के सदस्य गुरुवार को जब तहसील कार्यालय गुहार लगाने पहुंचे तो ग्राम में वन विभाग इनके झोपड़े तोड़ने की कार्रवाई कर रहा था।

परिवार की महिला सदस्यों ने कहा कि वन विभाग के कर्मचारी अब तक घर का राशन भी ले गए। कुर्सी टेबल तक नहीं छोड़ी। अब अगर बारिश हो जाती है तो हमें सर छुपाने की जगह नहीं है।

गुरुवार को नवागत एसडीएम अक्षत जैन ने इन पीड़ित परिवार के सदस्यों से चर्चा की तथा बयान दर्ज कराने को कहा। एसडीएम जैन ने आश्वासन दिया कि जरूरी कार्रवाई की जाएगी।