रेमडिसिवर नहीं तो कोई बात नहीं, स्टेरॉयड-एंटीबॉयोटिक व खून पतला करने की दवा रामबाण


डॉक्टरों का कहना है कि रेमडिसिवर नहीं है तो भी कोई बात नहीं। ऐसा इसलिए क्योंकि कोरोना का इलाज स्टेरॉयड, एंटीबॉयोटिक और खून पतला करने की दवा से किया जा सकता है। ये दवाइयां कोरोना को हराने के लिए रामबाण साबित हो रही हैं इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है।


देश गांव
ग्वालियर Updated On :
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ग्वालियर। कोरोना संक्रमण के इलाज में काफी हद तक कारगर बताई जा रही रेमडिसिवर इंजेक्शन बाजार से गायब हो चुकी है। इंजेक्शन उपलब्ध कराने के लिए शासन-प्रशासन भी हरसंभव प्रयास करने में जुटी हुई है।

दूसरी तरफ मरीज के परिजन इस इंजेक्शन के लिए मुंहमांगे दाम देने के लिए तैयार हैं, लेकिन इसके बाद भी इंजेक्शन नहीं मिल पा रहा है।

स्थानीय ड्रग इंस्पेक्टर दिलीप अग्रवाल ने इस बारे में जानकारी दी है कि निर्माता कंपनी ही रेमडिसिवर इंजेक्शन उपलब्ध नहीं करा पा रही है। बीते हफ्ते ग्वालियर को अधिकतम 100 इंजेक्शन की उपलब्धता हो सकी जबकि अस्पताल में 298 गंभीर कोरोना के मरीज भर्ती हैं, जिन्हें इस इंजेक्शन की आवश्यकता है।

डॉक्टर भी इसे पर्चे पर लिखकर दे रहे हैं, लेकिन इंजेक्शन उपलब्ध न होने से मरीज के परिजन काफी हैरान-परेशान हैं। उधर डॉक्टरों का कहना है कि रेमडिसिवर नहीं है तो भी कोई बात नहीं।

ऐसा इसलिए क्योंकि कोरोना का इलाज स्टेरॉयड, एंटीबॉयोटिक और खून पतला करने की दवा से किया जा सकता है। ये दवाइयां कोरोना को हराने के लिए रामबाण साबित हो रही हैं इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है।

जयारोग्य अस्पताल के मेडिसिन विभाग के डॉ. विजय गर्ग के मुताबिक, रेमडिसिवर इंजेक्शन मरीज को लक्षण आने के 8 से 10 दिन के भीतर दिए जाने पर यह असरकारक साबित हो सकता है। मरीज का ऑक्सीजन लेवल 90 से 94 के बीच में है तो उसके लिए रेमडिसिवर दवा असरकार साबित होगी। यदि ऑक्सीजन लेवल 94 से अधिक है तो आवश्यकता नहीं होती।

डॉक्टरों का कहना यह भी है कि जब मरीज गंभीर अवस्था (ऑक्सीजन लेवल 90 से कम हो जाता) में पहुंच जाता है तो रेमडिसिवर उतना असरकार नहीं रहता। शुरुआती दिनों में एक मरीज को छह इंजेक्शन की आवश्यकता होती है। इंजेक्शन के दो डोज पहले दिन व बाकी के चार डोज अगले चार दिन में देने होते हैं।

कोरोना से कमजोरी व शरीर में खून के थक्के जमने लगते हैं। ऐसे में एंटीबॉयोटिक दवा व खून पतला करने की दवा का उपयोग असरकार होता है। खून के थक्के जमने से खून की चाल में अवरोध पैदा होता और हृदयघात की परेशानी बढ़ जाती है।



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