प्रधानमंत्री मोदी ने कहा एमपी में है सामाजिक समरसता, आंकड़े बताते हैं वंचित-शोषित वर्ग पर यहां सबसे ज्यादा अपराध


प्रधानमंत्री ने सागर जिले में संत रविदास मंदिर की आधारशिला रखी है, बीते पांच महीने में मोदी का एमपी में यह पांचवा दौरा है।


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बड़ी बात Published On :

मप्र में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और अब सरकार हर वर्ग को साधने की कोशिश कर रही है। इसी क्रम में अनुसूचित जाति को साधने की तैयारी भी है। इसके लिए सौ करोड़ रुपये की लागत से संत रविदास का मंदिर बनवाने जा रही है। इसका भूमिपूजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया। सागर जिले के बड़तूमा में बन रहा यह मंदिर सौ करोड़ रुपये की लागत से तैयार करवाया जाएगा। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज देश के दलित, पिछड़े और आदिवासियों को उचित सम्मान और नए अवसर मिल रहे है, एससी-एसटी समाज के लोग आज अपने पैरों पर खड़े हो रहे हैं, आत्मनिर्भर बन रहे हैं। प्रधानमंत्री जिस मप्र में बुंदेलखंड की धरती पर यह दावा कर रहे थे वह प्रदेश आदिवासियों के खिलाफ होने वाले अपराधों में सबसे आगे है और बुंदेलखंड में दलितों के खिलाफ होने वाले अपराध इस समय सबसे ज्यादा सुनने को मिल रहे हैं।

शनिवार को प्रधानमंत्री ने रविदास मंदिर की आधारशिला रखी। यहां उन्होंने कहा कि एक-डेढ़ साल बाद जब मंदिर बन जाएगा तो उसके लोकार्पण के लिए भी वे जरुर आएंगे। संत रविदास मुझे यहां अगली बार आने का मौका देना वाले हैं। पीएम अपने संबोधन में कहा कि सागर में समरसता का महासागर उमड़ा हुआ है। देश की इसी साझी संस्कृति को और समृद्ध करने के लिए यहां संत रविदास स्मारक एवं कला संग्रहालय की नींव पड़ी। संतों की कृपा से मुझे इस पवित्र स्मारक के भूमिपूजन का पुण्य अवसर मिला है। मैं काशी का सांसद हूं, इसलिए ये मेरे लिए दोहरी खुशी का अवसर है।

संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने संत रविदास का एक दोहा भी पढ़ा।  उन्होनेकहा कि रविदास जी ने अपने दोहे में कहा है- ऐसा चाहूं राज मैं, जहां मिलै सबन को अन्न, छोट बड़ों सब से, रैदास रहें प्रसन्न। पीएम ने कहा कि आजादी के अमृतकाल में हम देश को गरीबी-भूख से मुक्त करने के लिए प्रयास कर रहे हैं। कोरोना के दौरान जब पूरी दुनिया परेशान थी तब भी मैंने सोचा कि किसी को भूखे पेट नहीं सोने दूंगा। मैं जानता हूं कि भूख क्या होती है।

पीएम मोदी ने यहां अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं उन्होंने कहा कि सागर के नाम में ही सागर (समुद्र) है। सागर से लाखा बंजारा का नाम भी जुड़ा है। उन्होंने पानी की जरूरत समझी और इसके लिए काम किया। आज पिछड़े-आदिवासी क्षेत्रों में पानी पहुंच रहा है। हम लाखा बंजारा की योजना आगे बढ़ा रहे हैं। मोदी ने कहा कि आदिवासी-दलित-पिछड़े वर्ग के लोगों ने राष्ट्र के विकास में भूमिका निभाई है। बाबा साहब से जुड़े स्थलों को पंचतीर्थ के रूप में विकसित करने का बीड़ा उठाया है।  यहां उन्होंने इंदौर के महू में स्थित पातालपानी स्टेशन का नाम टंट्या भील का नाम करने, भोपाल के स्टेशन का नाम कमलापति स्टेशन करने जैसे अपनी सरकार के काम कहे हैं। पीएम ने कहा कि मप्र में पहली बार दलित आदिवासी समाज को उनका अधिकार मिल रहा है।

मप्र में सामाजिक न्याय 

प्रधानमंत्री ने मप्र में सामाजिक न्याय की बात कही लेकिन यहां की जमीनी स्थिति ऐसा नहीं बताती। सीधी में आदिवासी पर पेशाब करने का मामला हो या छतरपुर में दलित को मैला खिलाने का मामला मप्र में ऐसे अपराध अक्सर सुनने को मिलते हैं। इस राज्य में आदिवासियों और दलितों के खिलाफ होने वाले अपराधों की संख्या कम नहीं है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार आदिवासियों पर होने वाले अपराधों के मामले में मप्र पहले नंबर पर आता है वहीं दलितों पर होने वाले अपराध भी यहां कम नहीं हैं। साल 2019 में दलितों पर होने वाले अपराध के मामले में मध्य प्रदेश दूसरे नंबर पर था। एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार यहां साल 2018 से लेकर साल 2021 के बीच यहां दलितों पर होने वाले अपराधों में 51.7%  की बढ़ोत्तरी हुई थी। एनसीआरबी कहता है कि  प्रदेश में एक लाख आबादी पर 63 से ज्यादा अपराध अनुसूचित जातियों पर हो रहे हैं।

मप्र की विधानसभा में 35 सीटें एससी के लिए आरक्षित हैं। यहां दलितों की आबादी करीब 65 लाख बताई जाती है। चुनावी स्थिति की बात करें तो यहां दलित दोनों दलों के साथ नजर आते हैं। आरक्षित सीटों में से यहां 18 सीटों पर कांग्रेस और 17 सीटों पर भाजपा की जीत हुई है। हालांकि 2020 के बाद कांग्रेस के चार और विधायक भाजपा में शामिल हो गए थे।



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