सिंगरौलीः जमीन बचाने के लिए कड़ाके की सर्दी में चौबीसों घंटे धरने पर बैठे आदिवासी


समिति का आरोपः आंदोलन को खत्म करने के लिए आदिवासियों पर दबाव डाल रहा है प्रशासन।
आंदोलनकारी आदिवासियों से मुलाकात करने कल सिंगरौली जाएंगे डॉ. सुनीलम।


देश गांव
उनकी बात Updated On :

भोपाल। सिंगरौली जिले के आदिवासी अपनी ज़मीन के लिए आंदोलन कर रहे हैं। यहां वन विभाग वृक्षा रोपण करने के लिए उनकी ज़मीन ले रहे हैं। यहां के आदिवासी 31 दिसंबर से लगातार धरने पर बैठे हुए हैं।

आदिवासियों का आरोप है कि स्थानीय प्रशासन उन पर लगातार यह प्रदर्शन खत्म करने का दबाव बना रहा है। उनके मुताबिक वे अपनी जमीन पर बने रहना चाहते हैं और इसके लिए वे आंदोलन जारी रखेंगे।

उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों यहां के एसडीएम आदिवासियों के बीच पहुंचे थे जहां उन्होंने एक पत्रकार से अभद्रता की और बाद में उसे पिटवाया था।

सिंगरौली जिले के चितरंगी तहसील के डाला सोनझर में कुछ आदिवासी अपनी जमीन बचाने के लिए धरने पर बैठे हैं। यहां सुरियाली कोल माइंस के कारण वन भूमि प्रभावित हो रही है और अब वन विभाग राजस्व की जमीन पर वैकल्पिक वृक्षारोपण कर रहा है। यह जमीन इन्हीं आदिवासियों और दलितों की है। इस परियोजना में आठ गांव प्रभावित हो रहे हैं।

प्रदर्शन पर बैठे लोगों का आरोप है कि यहां उनकी खड़ी फसल तबाह कर दी गई है। आदिवासियों के मुताबिक वे इस जमीन पर कई वर्षों से काबिज हैं। धरने पर बैठे लोगों  के मुताबिक, उनके घर यहां है और जमीन पर फसल खड़ी है। ऐसे में जब तक उनके लिए नीतिगत मुआवजा और रहने के लिए दूसरी स्थायी व्यवस्था नहीं दी जाती यह जमीन लेना अनुचित है।

किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष पूर्व विधायक डॉ. सुनीलम ने बताया कि आदिवासियों के भूमि अधिग्रहण पर तत्काल रोक लगाने को लेकर उन्होंने 20 जनवरी को मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है और इसकी प्रति वन मंत्री, प्रभारी मंत्री, पुलिस महानिदेशक, जिला कलेक्टर और एसपी को भी भेजी है।

डॉ. सुनीलम ने कहा कि चितरंगी एसडीएम द्वारा आदिवासियों की भूमि अधिग्रहण के संबंध में प्रश्न पूछे जाने पर डिप्टी कलेक्टर की उपस्थित में एक मीडिया कर्मी से मारपीट की गई थी। जिसका वीडियो भी वायरल हुआ है।

उन्होंने कहा कि किसी भी अधिकारी को कानून हाथ में लेने का अधिकार नहीं है तथा कानून हाथ में लेने वाले किसी भी नागरिक पर जो कार्यवाही होती है, वह कार्यवाही अधिकारियों पर भी होनी चाहिए। डॉ. सुनीलम 25 जनवरी मंगलवार को खुद भी सिंगरौली में इन आदिवासियों के बीच पहुंच रहे हैं।



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