कांग्रेस से भी निराश हो रहे बेरोजगार युवा, पूर्व मुख्यमंत्रियों ने सवाल सुने पर नहीं दिए ठोस जवाब


राहुल गांधी म्यूजिक कंसर्ट में तो गए लेकिन बेरोजगार युवाओं की महापंचायत में नहीं वहीं महापंचायत में पहुंचे नेताओं ने युवाओं के सवाल तो लिए लेकिन उनके ठोस जवाब नहीं दिए।


देश गांव
उनकी बात Updated On :

इंदौर। रविवार को शहर में बेरोजगार महापंचायत हुई जहां तकरीबन एक हजार से अधिक युवा पहुंचे थे। यह कार्यक्रम उस स्थान से कुछ ही दूरी पर हो रहा था जहां कांग्रेस नेता राहुल गांधी अपनी भारत जोड़ो यात्रा के साथ रुके हुए थे। इन युवाओं को उम्मीद थी कि महापंचायत में राहुल गांधी भी आएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

राहुल गांधी ने अपने प्रतिनिधियों के तौर पर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ, दिग्विजय सिंह और जयराम रमेश को भेजा। महापंचायत में राहुल गांधी को भी न्योता दिया गया था, लेकिन वे नहीं आए जिससे युवा खासे निराश दिखाई दिए। हालांकि राहुल शाम को युवाओं के बीच म्यूजिक कंसर्ट में जरूर पहुंचे।

कुछ दिनों पहले भारतीय जनता पार्टी को वोट ना देने की कसम खाने वाले युवाओं को रविवार को कांग्रेस का साथ मिला। कांग्रेसी नेताओं ने बेरोजगार महापंचायत में पहुंचकर छात्रों से बात की। इस दौरान महापंचायत का आयोजन करने वाली संगठन नेशनल एजुकेटेड यूथ यूनियन के सदस्यों ने अपने कुछ सवाल रखे जिन्हें नेताओं ने दर्ज किया और कहा कि वे राहुल गांधी तक यह सवाल पहुंचाएंगे और संभवतः राहुल गांधी रात को ही होने वाली आम सभा में इन सवालों के जवाब भी देंगे, लेकिन इन सवालों से जुड़े कोई जवाब राहुल गांधी ने सीधे तौर पर नहीं दिए।

 

बेरोजगार युवाओं ने राहुल गांधी के सामने जो सवाल रखे उनमें प्रमुख रूप से कांग्रेस की रोजगार की नीतियों से जुड़े सवाल थे। इन युवाओं ने कांग्रेसी नेताओं से पूछा कि अगर वे सत्ता में आए तो क्या रोजगार के लिए कोई इंतजाम करेंगे, इसके अलावा युवाओं ने आरक्षण, पदोन्नति आदि से जुड़े सवाल भी पूछे। इसके अलावा इन युवाओं नेम रोजगार से जुड़ा एक कानून बनाने की भी मांग रखी और उसके लिए एक ड्राफ्ट सौंपा।

भारतीय जनता पार्टी और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की शिकायत करते हुए युवाओं ने कांग्रेस से पूछा कि क्या अगर कांग्रेस पार्टी सत्ता में आती है तो क्या वे युवाओं को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने पर कोई मुकदमा ना करने का कानून बनाएंगे! इस महापंचायत में शिक्षक भर्ती से जुड़े सवाल भी पूछे गए।

इन सवालों को जहां पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और दिग्विजय सिंह के द्वारा सराहा जा रहा था तो वही स्थानीय विधायक जीतू पटवारी कुछ ज्यादा ही हड़बड़ी में नजर आए वह युवाओं को कई बार टोकते दिखे और सवालों को जल्दी-जल्दी पूछने का दबाव बनाते रहे। हालांकि यह आयोजन जीतू पटवारी के द्वारा ही संभव हो सका।

पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने युवाओं के इस प्रदर्शन को काफी सराहा। उन्होंने कहा कि जब वह मुख्यमंत्री थे तब उन्होंने निजी कंपनियों में 70% स्थानीय लोगों को भर्ती करने के लिए कानून बनाया था, लेकिन बाद में उसका पालन नहीं हुआ और अगर अब वे फिर सत्ता में आएंगे तो बेरोजगारी खत्म करने के लिए सुनिश्चित कदम उठाएंगे।

कांग्रेस से भी निराश बेरोजगार युवा!

राहुल गांधी के पंचायत में ना पहुंचने से युवाओं में नाराजगी और निराशा दोनों थी। संगठन नेयू के राधे जाट ने बताया कि उन्हें उम्मीद थी कि बेरोजगारी को लेकर लगातार बात करने वाले राहुल गांधी इस समस्या पर युवाओं के बीच पहुंचेंगे, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।

राधे जाट ने कहा कि कांग्रेस अगर बेरोजगारी का मुद्दा पुरजोर तरीके से उठाती तो शायद मध्यप्रदेश के सरकारी रिकॉर्ड में पंजीकृत 35 लाख बेरोजगारों का दिल जीत सकती थी, लेकिन उनका रवैया बेहद ही शिथिल रहा।

राहुल बेरोजगार युवाओं के बीच ना पहुंचकर रात को म्यूजिक कंसर्ट में पहुंचे। वहीं कांग्रेस नेताओं द्वारा सीधी बात ना किए जाने पर भी आयोजन स्थल पर बैठे कई छात्रों में निराशा रही है।

इन छात्रों ने बताया कि उन्हें उम्मीद थी कि कमलनाथ और दिग्विजय सिंह संविदा नीति और आउटसोर्सिंग जैसी समस्याओं पर बात करेंगे लेकिन इन पूर्व मुख्यमंत्रियों ने इस पूरे मामले पर लगभग चुप्पी बनाए रखी। प्रदेश में करीब डेढ़ लाख संविदा कर्मचारी हैं और तकरीबन 40 हजार आउटसोर्सिंग कर्मचारी बिजली विभाग में काम कर रहे हैं इन सभी में सरकार के प्रति खासा गुस्सा है।

इन कर्मचारियों ने भी कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मिलने की कोशिश की लेकिन कांग्रेस के स्थानीय नेताओं ने इन्हें ज्यादा आगे तक पहुंचने ही नहीं दिया। कॉन्ग्रेस बेरोजगारी और रोजगार में आ रही कठिनाइयों के मुद्दे पर युवाओं और कर्मचारियों के लिए सरकार के खिलाफ कोई बहुत ज्यादा मुखर नजर नहीं आ रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में क्या यह युवा कांग्रेस की ओर आएंगे यह कहना आप फिलहाल मुश्किल है।