ज्यादा बिल बनाकर लूटने वाले अस्पतालों को कलेक्टर की चेतावनी, शिकायत पर प्रशासन करेगा कार्रवाई

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इन्दौर Published On :
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इंदौर। कोरोना उपचार के नाम पर अस्पतालों द्वारा मरीजों को थमाए जा रहे अनाप-शनाप बिलों की लगातार आ रही शिकायतों के बाद इंदौर कलेक्टर मनीष सिंह ने सभी निजी अस्पतालों में विविध सेवाओं को लेकर दरें तय करने संबंधी आदेश जारी कर दिया जो सोमवार से लागू हो गया।

कलेक्टर ने साथ ही अधिक बिल की शिकायतों की जांच के लिए शहरी सीमा के लिए अपर कलेक्टर अजय देव शर्मा और ग्रामीण क्षेत्र के लिए अपर कलेक्टर राजेश राठौर को प्रभारी बनाया है।

यह संबंधित से दस्तावेजों के साथ लिखित शिकायत लेकर जोनल मेडिकल अधिकारियों की मदद से 48 घंटे के भीतर जांच करेंगे और कार्रवाई होगी।

कलेक्टर ने अस्पताल, मेडिकल स्टाफ आदि को सुरक्षा देने के निर्देश भी एसडीएम और पुलिस को दिए हैं। साथ ही अस्पताल के स्टाफ के छुट्टी जाने को लेकर चेतावनी दी है कि वैकल्पिक व्यवस्था हो।

साथ ही साथ गलत तरीके से मेडिकल छुट्टी लेने वालों की शासकीय बोर्ड में जांच होगी और गलत पाए जाने पर उनके खिलाफ एफआईआर होगी।

‘रेमडेसिविर’ में गड़बड़ी पर अस्पताल संचालक पर लगेगा रासुका –

कलेक्टर मनीष सिंह ने कहा कि रेमडेसिविर को लेकर हमने एक व्यवस्था बनाई है जिस भी मरीज के नाम पर रेमडेसिविर इंजेक्शन दिया जा रहा है। यदि उसे वह इंजेक्शन नहीं लगा और उसने ऐसा बयान दिया तो संबंधित अस्पताल संचालक के खिलाफ रासुका की कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने कहा कि अस्पताल संचालक का दायित्व है कि जो भी मरीज भर्ती है और उसे रेमडेसिविर जरुरत है तो वह उसे ही लगे। हमारे पास जो सूची वहां से आ रही है, उसे हम वेरीफाई कर रहे हैं।

यदि अस्पताल में इस प्रकार की गड़बड़ी हुई तो उन पर सीधे कार्रवाई होगी। सबसे ज्यादा गड़बड़ी 15, 20 या 50 बेड वाले अस्पताल कर रहे हैं। यह बात कलेक्टर मनीष सिंह ने रेसीडेंसी कोठी में बैठक के बाद पत्रकारों से कही।

कलेक्टर ने कहा कि जनता कर्फ्यू अभी तो 7 मई तक बढ़ाया गया है। पिछले एक महीने में हमने अस्पताल की शिकायतों को लेकर तीन से चार बैठकें की थीं। ज्यादा समस्या छोटे अस्पतालों से आ रही हैं।

यहां कुछ लोग बहुत ज्यादा अति कर रहे हैं, जो अनुचित है। मैं ऐसे अस्पताल संचालकों को यही कहना चाहूंगा कि वे इस प्रकार से राशि वसूलेंगे तो वह राशि कोई दुआ के साथ नहीं जाएगी।

उन्हें सोचना चाहिए कि इस प्रकार की राशि किसी को आज तक फली नहीं है। अस्पताल संचालकों को समझाइश देने के साथ कुछ अस्पताल भी बंद किए थे। कार्रवाई के बाद भी शिकायतें आ रही हैं।

मानवीयता न छोड़ें –

कलेक्टर ने कहा कि सभी अस्पताल मुनाफा कमा रहे हैं, लेकिन इस दौर में मानवीय पहलू को भी नहीं छोड़ना चाहिए। वह भी ईश्वर को मानते होंगे तो मानवीयता नहीं छोड़ें। मदद करने से लाभ भी होता रहेगा।

अब शहरी एरिया में संक्रमण कम होता दिख रहा है। अस्पतालों पर दबाव भी कम हो रहा है। ग्रामीण एरिया में संक्रमण की रोकथाम का काम कर रही टीम से कहा गया है कि छोटी पंचायत में 20 तो बड़ी में 30 बेड का कोविड केयर सेंटर बनाया जाए।

नगरीय निकाय में 50 से 150 बेड का बनाया है। सभी को बताया गया कि कोरोना लक्षण मिलने पर यहां पर भर्ती करें और उनकी सारी दवा, भोजन का ध्यान रखा जाए। इससे संक्रमण को रोका जा सकेगा।

अस्पतालों की शिकायत मिली –

हाल ही में ‘वी केयर’ नामक अस्पताल की भी शिकायत आई है। इसके अलावा ‘यूनिवर्सल अस्पताल’ की शिकायत आई है। दोनों अस्पतालों को डॉक्टर ही हेड कर रहे हैं। उसके बाद भी इतनी शिकायतें आ रही हैं।

‘आरके अस्पताल’ की भी शिकायत आई है। इसे देखते हुए हमने एक ऑर्डर जारी किया है। यदि अब इन्होंने इसका पालन नहीं किया तो सीधे एफआईआर की जाएगी। अब और अत्याचार आम जनता को बर्दाश्त नहीं करने दिया जाएगा।



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