भारत-भूटान ने अपने प्रगाढ़ संबंधों को और विस्तार देने का जताया संकल्प

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भूटान नरेश जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक ने मंगलवार को नई दिल्ली में एक द्विपक्षीय बैठक की।

बैठक के दौरान, दोनों पक्षों ने अपने संबंधों को और बढ़ावा देने के लिए द्विपक्षीय सहयोग के सभी पहलुओं की समीक्षा की। इस दौरान पीएम मोदी ने भूटान में सामाजिक-आर्थिक सुधारों के लिए भारत के निरंतर समर्थन को दोहराया।

नई दिल्ली में मीडिया को जानकारी देते हुए, विदेश सचिव विनय मोहन क्वात्रा ने कहा, भूटान नरेश जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक ने पीएम मोदी को भूटान द्वारा की गई सुधार पहलों के बारे में जानकारी दी।

उन्होंने कहा, पीएम मोदी ने भी भूटान के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए भारत के पूर्ण समर्थन को दोहराया। उन्होंने कहा, दोनों देशों ने आर्थिक और विकास साझेदारी, व्यापार सुविधा उपायों और व्यापार, कनेक्टिविटी, निवेश, ऊर्जा और अंतरिक्ष और स्टार्टअप सहित नए क्षेत्रों में सहयोग पर ध्यान केंद्रित करते हुए अपने द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की।

भारत भूटान से कृषि जिंसों के निर्यात के लिए एक अतिरिक्त स्टैंडबाय क्रेडिट सुविधा करेगा शुरू –

बैठक के परिणामों के बारे में बात करते हुए, विदेश सचिव विनय मोहन क्वात्रा ने कहा, भारत भूटान की आगामी 13वीं पंचवर्षीय योजना के लिए अपना समर्थन बढ़ाएगा।

उन्होंने कहा, भारत भूटान से कृषि जिंसों के निर्यात के लिए एक अतिरिक्त स्टैंडबाय क्रेडिट सुविधा और दीर्घकालिक स्थायी व्यवस्था को आकार देने के लिए भी काम करेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि देश पेट्रोलियम और कोयले जैसी महत्वपूर्ण वस्तुओं की सुनिश्चित आपूर्ति के लिए दीर्घकालिक द्विपक्षीय व्यवस्था विकसित करने के लिए भी काम करेगा।

भारत और भूटान के बीच होगा पहला रेल संपर्क –

विदेश सचिव विनय क्वात्रा ने कहा, दोनों देश भारत-भूटान सीमा पर पहली एकीकृत चेक पोस्ट स्थापित करने पर विचार कर रहे हैं, जो जयगांव के पास होगी।

उन्होंने कहा, भारत और भूटान भूटानी पक्ष के परामर्श से भारत सरकार के समर्थन के माध्यम से प्रस्तावित कोकराझार-गेलेफू रेल लिंक परियोजना में भी तेजी लाएंगे। विदेश सचिव ने कहा, यह ऐतिहासिक होगा क्योंकि यह भारत और भूटान के बीच पहला रेल संपर्क होगा।

भूटान में भारतीय पर्यटकों के लिए छूट –

ज्ञात हो, भूटान में आने वाले पर्यटकों को करीब 200 डॉलर प्रति दिन देना होता है जबकि भारतीयों के लिए यह मात्र 1200 रुपये है जो कि काफी कम है।

अभी यह प्रायोगिक आधार पर किया गया है और बाद में इस पर देखा जाएगा की कैसी परिस्थितियां आती हैं। वर्तमान में भारतीय पर्यटकों का वहां जाना हो रहा है।

बता दें, भूटान नरेश जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक तीन दिवसीय भारत यात्रा पर हैं। भूटान नरेश के साथ विदेश और विदेश व्यापार मंत्री डॉ. टांडी दोरजी और भूटान सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी भी आए हैं। यह यात्रा भारत-भूटान की घनिष्ठ और अनूठी साझेदारी को और मजबूत करेगी।



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