जस्टिस चंद्रचूड़ बने भारत के 50वें मुख्य न्यायधीश, जानिए उनके ये ऐतिहासिक फैसले


भारत के 50 वें मुख्य न्यायाधीश बने जस्टिस चंद्रचूड़, उनके पिता भारत के 16 वें मुख्य न्यायाधीश थे, जस्टिस चंद्रचूड़ की प्रगतिशील और उदारवादी छवि


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नई दिल्ली। देश के सुप्रीम कोर्ट के नए मुख्य न्यायाधीश डीवाय चंद्रचूड़ बन चुके हैं उन्होंने बुधवार सुबह राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू के सामने मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली।

चंद्रचूड़ भारत के 50 में मुख्य न्यायाधीश हैं उनका कार्यकाल 10 नवंबर 2024 तक होगा। मुख्य न्यायाधीश के रूप में उन्हें काफी लंबे समय तक काम करने का मौका मिलेगा। जस्टिस चंद्रचूड़ के पिता जस्टिस वायवी चंद्रचूड़ भी वर्ष 1985 में सुप्रीम कोर्ट के 16वें मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं।

ऐसे में यह पहली बार होने जा रहा है कि पिता और पुत्र दोनों ने ही भारत के मुख्य न्यायाधीश के रूप में अपनी सेवाएं दी।

जस्टिस चंद्रचूड़ इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश और बॉम्बे उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश रह चुके हैं। उन्हें एक प्रगतिशील और उदारवादी जज के रूप में जाना जाता है।

अपने पद पर रहते हुए जस्टिस चंद्रचूड़ ने कई ऐतिहासिक फैसले लिए इनमें कुछ फैसले तो ऐसे थे जिनमें उन्होंने अपने पिता जस्टिस वायवी चंद्रचूड़ के फैसलों को भी बदल दिया।

जस्टिस डीवाय चंद्रचूड़ ने जो महत्वपूर्ण फैसले लिए उनमें महिलाओं को 24 हफ्तों के दौरान गर्भपात का अधिकार देने वाला एतिहासिक निर्णय भी शामिल है।

जस्टिस चंद्रचूड़ सबरीमाला मामले में बहुमत की राय का हिस्सा थे, जिसने मासिक धर्म की उम्र की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी थी। महिलाओं के मंदिर में प्रवेश को संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन देखा गया।

जस्टिस चंद्रचूड़ उस बैंच का भी हिस्सा रहे हैं जिसने सहमति से समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया और अनुच्छेद 21 के तहत निजता को मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता दी, व्यभिचार को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया।

इसके अलावा जस्टिस चंद्रचूड़ 5 जजों की बेंच के भी सदस्य थे, जिसने अयोध्या-बाबरी मस्जिद मामले का फैसला किया था।



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